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Saturday, July 30, 2022

Daily Diary Entry DDE-5

These are RTG or insights that came in my mind:

1). ये धर्म के नाम पे इतनी मारा-मारी क्यों है?
    कोई कहता कण-कण में भगवान है, जहा कुछ नहीं है वहाँ भी ईश्वर है।
    कोई कहता मूर्ति में भगवान है Plus चित्र
    कोई कहता शिव ही सत्य है।
    कोई Unreligious है! In Europe and Australia
    कोई कहता Allah hu Allah
    कोई गुरु को मानते है- Sikhs
    कोई Christ को
    कोई वेदों को maanta है, पर मूर्ति पूजन नहीं
    कोई कुछ कहता है..
    कोई कहता हम ही वो 33 Crore/कोटि देवी-देवता हैं
    कोई कहता कर्म ही धर्म है
     कोई जहाँ ज्यादा फायदा दिखे, वहीं भगवान है(ऐसा मानता है)
    etc and otc also
    

    ऐसा क्यों?
    किसी के लिए ये रोटी भगवान
    कहीं sEXX को ही  good माना जाता है।

2). वैसे sabhi इंसान एक-दूसरे के साथ experiment-experiment ही खेलते हैं।
    सभी खेलते हैं। कोई relation जब काम नहीं कर रहीं होती तो, सभी Change कर देतें हैं।
    सभी एक-दूसरे की हैसियत नापते हैं, ऐसी ही है ये दूनिया चाहे कोई कुछ भी कह ले।
    Relations maintain रखो सबके साथ
    आपणे काम से प्यार करना सीखो, बाकी सब अपने आप पीछे आएगा। Time के साथ अपने आप को जाता है सब कुछ(almost)(अपने-आप setting आ जाती है)



30-40 साल और पड़े है Life के, देखले क्या काम करना हैं।





3). तो 0 things state- जब मैं अकेला हूँ किसी Island पर, कोई इंसान नहीं है, कोई resources नहीं है।
4.) ये दूनिया ऐसी ही है,
    देख- मैंने सबके पास फोन करना छोड़ दिया, तो सबने मेरे पास भी फोन 📱 करना छोड़।
    बड़ी मतलबी दूनिया है।
    सारे रिश्ते-नाते मतलब/काम के 13.7.22
Mohit, Vineet, Rajat,  Ankit, etc & otc
पता नहीं इनकी सोच क्या है, इनको क्या दिख रहा है।
    
अब Right-thinking🤔 develop होती जा रही है, 
    Thanks Baba


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